“केंद्रीय बजट 2026 में ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए PLI स्कीम का आवंटन बढ़ाकर 5,940 करोड़ रुपये किया गया, लिथियम-आयन सेल्स पर कस्टम ड्यूटी छूट 2028 तक बढ़ाई गई, क्रिटिकल मिनरल्स प्रोसेसिंग पर छूट दी गई, रेयर अर्थ कॉरिडोर्स स्थापित करने की योजना शुरू की गई और EV सप्लाई चेन को मजबूत बनाने पर फोकस किया गया, जो घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देगा और आयात पर निर्भरता कम करेगा।”
बजट 2026: ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए निर्मला सीतारमण की घोषणाएं
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 में ऑटोमोबाइल सेक्टर को मजबूत बनाने के लिए कई कदम उठाए, जिनमें इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) इकोसिस्टम पर विशेष जोर दिया गया। PLI स्कीम के तहत ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स के लिए आवंटन को 2025-26 के संशोधित अनुमान 2,091 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5,940 करोड़ रुपये कर दिया गया, जो सेक्टर में एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहन देगा। इस बढ़ोतरी से Tata Motors, Mahindra और Hyundai जैसी कंपनियां लाभान्वित होंगी, क्योंकि इससे लोकल प्रोडक्शन बढ़ेगा और एक्सपोर्ट्स में वृद्धि होगी।
EV बैटरी मैन्युफैक्चरिंग को सपोर्ट करने के लिए लिथियम-आयन सेल्स और बैटरी प्रोडक्शन में इस्तेमाल होने वाले की इनपुट्स पर कस्टम ड्यूटी छूट को 31 मार्च 2028 तक बढ़ा दिया गया। इससे बैटरी कॉस्ट में 10-15% की कमी आने की उम्मीद है, जो EV की कीमतों को किफायती बनाएगा और Ola Electric, Ather Energy जैसी स्टार्टअप्स के लिए ग्रोथ ऑपर्च्युनिटी बढ़ाएगा। क्रिटिकल मिनरल्स जैसे लिथियम, कोबाल्ट और रेयर अर्थ एलिमेंट्स की प्रोसेसिंग के लिए कैपिटल गुड्स पर कस्टम ड्यूटी छूट दी गई, जो इंडिया की EV सप्लाई चेन को स्ट्रॉन्ग बनाएगी और चीन पर निर्भरता को 20% तक कम कर सकती है।
सेक्टर में रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स की मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए 2025 में लॉन्च की गई स्कीम को विस्तार देते हुए, ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे मिनरल-रिच स्टेट्स में डेडिकेटेड रेयर अर्थ कॉरिडोर्स स्थापित करने की योजना घोषित की गई। ये कॉरिडोर्स माइनिंग, प्रोसेसिंग, रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग को एकीकृत करेंगे, जिससे ऑटो सेक्टर में इस्तेमाल होने वाले मैग्नेट्स का घरेलू उत्पादन बढ़ेगा और EV मोटर्स की कॉस्ट में कमी आएगी। अनुमान है कि इससे 2028 तक इंडिया का रेयर अर्थ प्रोडक्शन 30% बढ़ सकता है।
ऑटो सेक्टर को अप्रत्यक्ष लाभ देते हुए, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम का आउटले 40,000 करोड़ रुपये तक बढ़ाया गया, जो EV इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर सप्लाई को बूस्ट देगा। MSMEs के लिए “चैंपियन MSMEs” क्रिएट करने की पहल से छोटे ऑटो पार्ट्स मैन्युफैक्चरर्स को फाइनेंशियल सपोर्ट मिलेगा, जिससे सप्लाई चेन में इनोवेशन बढ़ेगा। लॉजिस्टिक्स सेक्टर में इंफ्रास्ट्रक्चर पुश से ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट कम होगी, जो ऑटो एक्सपोर्ट्स को 15% तक बढ़ा सकती है।
बजट में कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग के लिए 10,000 करोड़ रुपये की स्कीम लॉन्च की गई, जो ऑटो लॉजिस्टिक्स को ग्लोबली कॉम्पिटिटिव बनाएगी। सेक्टर के लिए कोई नई पॉलिसी चेंज नहीं किया गया, लेकिन मौजूदा PLI स्कीम की निरंतरता से इंडस्ट्री में स्थिरता आएगी। SIAM के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में ऑटो सेक्टर की ग्रोथ 8% रही, और इन घोषणाओं से 2026 में यह 12% तक पहुंच सकती है।
प्रमुख घोषणाओं की तालिका
| घोषणा | विवरण | प्रभाव |
|---|---|---|
| PLI स्कीम आवंटन | 5,940 करोड़ रुपये (2026-27 के लिए) | एडवांस्ड ऑटो कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग बढ़ेगी, जॉब क्रिएशन में 20% वृद्धि संभव |
| लिथियम-आयन सेल्स पर ड्यूटी छूट | 31 मार्च 2028 तक विस्तार | EV बैटरी कॉस्ट कम होगी, मार्केट पेनेट्रेशन 15% बढ़ सकता है |
| क्रिटिकल मिनरल्स प्रोसेसिंग | कैपिटल गुड्स पर छूट | आयात निर्भरता घटेगी, लोकल सप्लाई चेन मजबूत होगी |
| रेयर अर्थ कॉरिडोर्स | ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु में स्थापना | रेयर अर्थ प्रोडक्शन 30% बढ़ेगा, EV मोटर्स सस्ते होंगे |
| इलेक्ट्रॉनिक्स स्कीम विस्तार | 40,000 करोड़ रुपये तक बढ़ोतरी | EV इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बूस्ट, सेमीकंडक्टर इंटीग्रेशन बढ़ेगा |
ऑटो सेक्टर में इन घोषणाओं से इन्वेस्टमेंट आकर्षित होगा, खासकर फॉरेन प्लेयर्स जैसे Tesla और BYD से। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि EV एडॉप्शन रेट 2025 के 5% से बढ़कर 2028 तक 20% हो सकता है। बजट में एनर्जी सिक्योरिटी पर फोकस से नॉन-रिन्यूएबल फ्यूल इंपोर्ट्स कम होंगे, जो ऑटो सेक्टर की सस्टेनेबिलिटी को बढ़ाएगा। MSMEs के लिए क्लस्टर-बेस्ड प्लग-एंड-प्ले मॉडल से छोटे यूनिट्स को टेक्नोलॉजी एक्सेस मिलेगा, जिससे ऑटो पार्ट्स एक्सपोर्ट्स में 25% ग्रोथ हो सकती है।
सेक्टर में रिसर्च एंड डेवलपमेंट को प्रोत्साहन देने के लिए इंडस्ट्री-लेड सेंटर्स स्थापित किए जाएंगे, जो EV टेक्नोलॉजी में इंडिया को ग्लोबल लीडर बना सकते हैं। बजट से ऑटो सेक्टर की GDP कॉन्ट्रिब्यूशन 7% से बढ़कर 9% हो सकती है। इन कदमों से जॉब क्रिएशन में लाखों अवसर पैदा होंगे, खासकर स्किल्ड वर्कफोर्स में।
सेक्टर पर प्रभाव के प्रमुख बिंदु
EV ग्रोथ : बैटरी कॉस्ट रिडक्शन से अफोर्डेबिलिटी बढ़ेगी, 2026 में EV सेल्स 10 लाख यूनिट्स पार कर सकती है।
मैन्युफैक्चरिंग पुश : लोकल प्रोडक्शन बढ़ने से मेक इन इंडिया को बूस्ट, एक्सपोर्ट्स 50 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकते हैं।
सस्टेनेबिलिटी : क्रिटिकल मिनरल्स फोकस से एनवायरनमेंटल इंपैक्ट कम होगा, ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा।
MSME सपोर्ट : चैंपियन MSMEs से छोटे सप्लायर्स को फाइनेंसिंग, जो बड़े ऑटोमेकर्स के साथ इंटीग्रेशन बढ़ाएगा।
इन्वेस्टमेंट : बढ़े हुए आवंटन से FDI में 15% वृद्धि संभव, खासकर EV और कंपोनेंट्स सेगमेंट में।
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