“केंद्रीय बजट 2026-27 में कैपेक्स को 12.2 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाया गया, जिसमें 7 फ्रंटियर सेक्टरों पर फोकस कर मैन्युफैक्चरिंग को बूस्ट देने का ऐलान; कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट स्कीम से टनल बोरिंग मशीनों का घरेलू उत्पादन बढ़ेगा, जिससे मेट्रो और हाई-ऑल्टीट्यूड रोड प्रोजेक्ट्स तेज होंगे; इंपोर्ट डिपेंडेंसी घटाकर चीन को चुनौती, साथ ही MSME सपोर्ट और सिटी इकोनॉमिक रीजन डेवलपमेंट से ग्रोथ को गति।”
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत करने के लिए 7 रणनीतिक फ्रंटियर सेक्टरों पर बड़ा निवेश ऐलान किया है, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर लीडरशिप हासिल कर सके। इन सेक्टरों में सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, बायो-फार्मा, रिन्यूएबल एनर्जी, डिफेंस इक्विपमेंट, कंस्ट्रक्शन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर इक्विपमेंट और एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स शामिल हैं। इस कदम से न सिर्फ घरेलू उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि चीन से इंपोर्ट पर निर्भरता कम होगी, जो वर्तमान में टनल बोरिंग मशीनों और मेट्रो इक्विपमेंट के लिए 60% से ज्यादा है।
बजट में कंस्ट्रक्शन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर इक्विपमेंट (CIE) एन्हांसमेंट स्कीम लॉन्च की गई है, जिसके तहत 13,000 करोड़ रुपये का इंसेंटिव पैकेज दिया जाएगा। यह स्कीम टनल बोरिंग मशीनों, रोपवे सिस्टम्स, बैकहो लोडर्स, क्रॉलर क्रेन और टावर क्रेन जैसे हाई-वैल्यू इक्विपमेंट के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देगी। वर्तमान में भारत मेट्रो प्रोजेक्ट्स के लिए जर्मनी और चीन से मशीनें इंपोर्ट करता है, लेकिन नई स्कीम से 2028 तक 40% लोकल प्रोडक्शन का लक्ष्य रखा गया है, जो दिल्ली-मेरठ RRTS और मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन जैसे प्रोजेक्ट्स को स्पीड देगा।
इन 7 सेक्टरों में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग के लिए 50,000 करोड़ रुपये का अलग फंड आवंटित किया गया है, जिसमें तमिलनाडु और गुजरात में नए प्लांट्स सेटअप होंगे। यह कदम भारत को चिप सप्लाई चेन में मजबूत बनाएगा, जहां चीन का 70% से ज्यादा मार्केट शेयर है। इलेक्ट्रिक व्हीकल्स सेक्टर में बैटरी मैन्युफैक्चरिंग के लिए PLI स्कीम को एक्सटेंड कर 20,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त दिए गए हैं, जिससे EV एडॉप्शन 2030 तक 30% तक पहुंच सकता है।
बायो-फार्मा सेक्टर को बायोफार्मा शक्ति इनिशिएटिव के तहत 100 अरब रुपये का बजट मिला है, जिसमें 1,000 क्लिनिकल ट्रायल साइट्स का नेटवर्क बनेगा। यह भारत को ग्लोबल बायोफार्मा हब बनाएगा, जहां वर्तमान में चीन का डोमिनेंस है। रिन्यूएबल एनर्जी में सोलर और विंड कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग के लिए 15,000 करोड़ रुपये का सपोर्ट, जो 500 GW रिन्यूएबल कैपेसिटी टारगेट को सपोर्ट करेगा।
डिफेंस इक्विपमेंट सेक्टर में लोकल प्रोडक्शन को बढ़ावा देने के लिए 25,000 करोड़ रुपये का डेडिकेटेड फंड, जिसमें ड्रोन और आर्टिलरी सिस्टम्स शामिल हैं। यह आत्मनिर्भर भारत अभियान का हिस्सा है, जो चीन बॉर्डर पर स्ट्रैटेजिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगा। एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स में स्मार्टफोन और लैपटॉप कंपोनेंट्स के लिए 10,000 करोड़ रुपये, जो एक्सपोर्ट को 1 लाख करोड़ रुपये तक ले जाएगा।
बजट में कुल कैपिटल एक्सपेंडिचर को 12.2 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाया गया है, जो पिछले साल के 11.2 लाख करोड़ से 9% ज्यादा है। इससे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में तेजी आएगी, खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में। सिटी इकोनॉमिक रीजन्स (CER) डेवलपमेंट के लिए प्रत्येक चुनिंदा CER को 5,000 करोड़ रुपये ओवर 5 ईयर्स मिलेंगे, जो लोकल मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स बनाएंगे।
MSME सेक्टर को चैंपियन MSME क्रिएशन के तहत सपोर्ट मिला है, जिसमें क्रेडिट गारंटी स्कीम को 2 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाया गया। यह छोटे मैन्युफैक्चरर्स को हाई-टेक इक्विपमेंट अपनाने में मदद करेगा, जैसे कि टनल कंस्ट्रक्शन टूल्स। एनर्जी सिक्योरिटी के लिए रेयर अर्थ कॉरिडोर डेवलपमेंट का ऐलान, जिसमें तमिलनाडु, केरल, ओडिशा और आंध्र प्रदेश शामिल हैं, जो मिनरल प्रोसेसिंग को बूस्ट देगा और चीन पर निर्भरता कम करेगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड सेटअप किया जाएगा, जो प्राइवेट डेवलपर्स को कंस्ट्रक्शन रिस्क्स से बचाएगा। हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए 7 नए प्रोजेक्ट्स का ऐलान, जिसमें मुंबई-दिल्ली और चेन्नई-बेंगलुरु शामिल हैं, जो मेट्रो नेटवर्क को इंटीग्रेट करेंगे।
7 फ्रंटियर सेक्टरों में बजट आवंटन और प्रभाव:
| सेक्टर | बजट आवंटन (करोड़ रुपये में) | मुख्य फोकस | चीन को चुनौती |
|---|---|---|---|
| सेमीकंडक्टर | 50,000 | चिप प्लांट्स और सप्लाई चेन | 70% मार्केट शेयर घटाना |
| इलेक्ट्रिक व्हीकल्स | 20,000 | बैटरी और EV कंपोनेंट्स | EV एक्सपोर्ट बढ़ाना |
| बायो-फार्मा | 10,000 (100 अरब कुल) | क्लिनिकल ट्रायल्स और ड्रग्स | ग्लोबल हब बनना |
| रिन्यूएबल एनर्जी | 15,000 | सोलर-विंड मैन्युफैक्चरिंग | 500 GW टारगेट |
| डिफेंस इक्विपमेंट | 25,000 | ड्रोन और आर्टिलरी | बॉर्डर सिक्योरिटी |
| कंस्ट्रक्शन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर इक्विपमेंट | 13,000 | टनल बोरिंग मशीनें | मेट्रो प्रोजेक्ट्स स्पीडअप |
| एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स | 10,000 | स्मार्ट डिवाइस कंपोनेंट्स | एक्सपोर्ट 1 लाख करोड़ |
यह आवंटन सेक्टर-वाइज ग्रोथ को ड्राइव करेगा, जहां कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट सेक्टर में 40% लोकल प्रोडक्शन बढ़ने से मेट्रो एक्सपेंशन जैसे दिल्ली मेट्रो फेज-4 और बेंगलुरु मेट्रो के नए रूट्स में देरी कम होगी। वर्तमान में भारत के 146,000 किलोमीटर नेशनल हाईवे नेटवर्क को और मजबूत करने के लिए 10-12% अतिरिक्त फंडिंग दी गई है, जो लॉजिस्टिक्स कॉस्ट को 9% तक घटा सकती है।
बजट में ट्रेड और मल्टीलेटरलिज्म पर दबाव के बीच भारत को आत्मनिर्भर बनाने का जोर है, जहां क्रिटिकल मिनरल्स और सप्लाई चेन्स को मजबूत किया जाएगा। रेयर अर्थ कॉरिडोर से मिनरल प्रोसेसिंग यूनिट्स सेटअप होंगी, जो EV और रिन्यूएबल्स के लिए जरूरी हैं। MSME के लिए डिजिटल पेनेट्रेशन बढ़ाने के लिए 5,000 करोड़ का फंड, जो टियर-2 शहरों में मैन्युफैक्चरिंग पार्क्स बनाएगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर पुश से टियर-2 शहर जैसे लखनऊ और इंदौर को ग्रोथ सेंटर्स बनाया जाएगा, जहां मेट्रो और टनल प्रोजेक्ट्स से कनेक्टिविटी बढ़ेगी। हाई-ऑल्टीट्यूड रोड्स के लिए स्पेशलाइज्ड मशीनरी का उत्पादन बढ़ने से लद्दाख और अरुणाचल जैसे क्षेत्रों में स्ट्रैटेजिक इंफ्रा मजबूत होगा। कुल मिलाकर, यह बजट मैन्युफैक्चरिंग को GDP में 25% तक ले जाने का रोडमैप देता है, जो चीन के 28% से मुकाबला करेगा।
मुख्य पॉइंट्स बजट के प्रभाव पर:
इंपोर्ट रिडक्शन: टनल मशीनों के लिए 60% इंपोर्ट घटाकर 20% तक लाना, जो सालाना 5,000 करोड़ की बचत करेगा।
जॉब क्रिएशन: 7 सेक्टरों से 1 करोड़ नई जॉब्स, खासकर मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रा में।
एक्सपोर्ट बूस्ट: सेमीकंडक्टर और EV से 2 लाख करोड़ अतिरिक्त एक्सपोर्ट।
फिस्कल कंसॉलिडेशन: डेफिसिट को 4.3% पर रखना, जो मैक्रो स्टेबिलिटी सुनिश्चित करेगा।
प्राइवेट इन्वेस्टमेंट: रिस्क गारंटी फंड से 50,000 करोड़ प्राइवेट कैपिटल आकर्षित।
अर्बन डेवलपमेंट: 7 हाई-स्पीड कॉरिडोर से ट्रैवल टाइम 50% कम।
एनर्जी सिक्योरिटी: रेयर अर्थ से क्रिटिकल मिनरल्स的自給率 30% बढ़ाना।
यह कदम भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं, जहां कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट सेक्टर का फोकस मेट्रो नेटवर्क को 1,000 किलोमीटर तक एक्सपैंड करेगा।
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