“एक युवक की F&O ट्रेडिंग की लत ने उसकी जिंदगी बर्बाद कर दी। 3 लाख मासिक सैलरी होने के बावजूद उसने शेयर बाजार में 2 करोड़ गंवा दिए और अब लाखों का कर्ज चुकाने में संघर्ष कर रहा है। SEBI की रिपोर्ट्स से पता चलता है कि 91% रिटेल ट्रेडर्स घाटे में हैं। लेख में जोखिम, आंकड़े और बचाव के तरीके बताए गए हैं।”
दिल्ली के 28 वर्षीय राहुल (बदला हुआ नाम) ने कभी सोचा नहीं था कि उसकी अच्छी-खासी IT जॉब और 3 लाख रुपये की मासिक सैलरी F&O ट्रेडिंग की चपेट में आकर बर्बाद हो जाएगी। 2023 में छोटे निवेश से शुरू हुई उसकी ट्रेडिंग यात्रा 2025 तक एक खतरनाक लत बन गई। शुरुआत में कुछ छोटे मुनाफे ने उसे आत्मविश्वास दिया, लेकिन जल्द ही ऑप्शन ट्रेडिंग के उतार-चढ़ाव ने उसे जकड़ लिया। उसने अपनी सैलरी, बचत और यहां तक कि दोस्तों से उधार लेकर 2 करोड़ रुपये से ज्यादा गंवा दिए। अब वह 50 लाख रुपये के पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड डेब्ट में डूबा है, जिसकी EMI चुकाने के लिए उसे अपनी जॉब के अलावा फ्रीलांसिंग करनी पड़ रही है। राहुल जैसे लाखों युवा भारतीय ट्रेडर्स इस जाल में फंस रहे हैं, जहां त्वरित अमीरी का सपना हकीकत में तबाही लाता है।
SEBI की ताजा रिपोर्ट्स से साफ है कि F&O सेगमेंट में रिटेल निवेशकों का घाटा लगातार बढ़ रहा है। FY25 में 1.06 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जिसमें 91% इंडिविजुअल ट्रेडर्स ने पैसे गंवाए। औसतन हर ट्रेडर को 2 लाख रुपये का घाटा उठाना पड़ा। पिछले तीन सालों (FY22 से FY24) में कुल घाटा 1.8 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। युवा ट्रेडर्स, खासकर 25-35 साल के बीच वाले, सबसे ज्यादा प्रभावित हैं क्योंकि वे सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स और ऐप्स के जरिए आकर्षित होते हैं। NSE के डेटा के मुताबिक, F&O वॉल्यूम 2025 में 20% बढ़ा, लेकिन प्रॉफिट सिर्फ 9% ट्रेडर्स को ही मिला।
F&O ट्रेडिंग की लत के पीछे कई वजहें हैं। यह एक जुआ जैसा है जहां लीवरेज से छोटी रकम बड़े दांव में बदल जाती है, लेकिन मार्केट वोलेटिलिटी से सब कुछ मिट जाता है। राहुल ने बताया कि वह दिन-रात चार्ट्स देखता रहता था, नींद गंवा दी और रिश्ते बिगड़ गए। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, यह डोपामाइन रिलीज से जुड़ी लत है, जहां हर ट्रेड एड्रेनालाइन रश देता है। SEBI ने 2025 में सख्त नियम लागू किए, जैसे ट्रेडिंग लिमिट और हाई रिस्क वार्निंग, लेकिन घाटा कम नहीं हुआ।
| वर्ष | कुल घाटा (लाख करोड़ रुपये) | घाटे में ट्रेडर्स (%) | औसत घाटा प्रति ट्रेडर (रुपये) |
|---|---|---|---|
| FY22 | 0.50 | 89 | 1.5 लाख |
| FY23 | 0.55 | 90 | 1.8 लाख |
| FY24 | 0.75 | 91 | 2.0 लाख |
| FY25 | 1.06 | 91 | 2.0 लाख |
इस टेबल से साफ है कि घाटा साल-दर-साल बढ़ रहा है। युवा ट्रेडर्स के लिए यह और खतरनाक क्योंकि उनकी सैलरी सीमित होती है, लेकिन लालच में वे क्रेडिट पर ट्रेडिंग करते हैं। 2026 में SEBI नए रेगुलेशंस ला सकता है, जैसे मिनिमम नेटवर्थ रिक्वायरमेंट और ट्रेडिंग ऐप्स पर लत चेक टूल्स।
F&O ट्रेडिंग की लत से बचने के लिए कुछ जरूरी कदम:
रिस्क असेसमेंट : ट्रेडिंग शुरू करने से पहले अपनी फाइनेंशियल स्थिति चेक करें। सिर्फ 10% से ज्यादा कैपिटल रिस्क न लें।
एजुकेशन : SEBI के फ्री कोर्सेस या NSE एकेडमी से सीखें। ब्लाइंड ट्रेडिंग से बचें।
लिमिट सेट : डेली ट्रेडिंग लिमिट लगाएं और स्टॉप-लॉस यूज करें।
प्रोफेशनल हेल्प : अगर लत लग गई तो फाइनेंशियल काउंसलर या थेरेपिस्ट से संपर्क करें।
डायवर्सिफिकेशन : F&O की बजाय म्यूचुअल फंड्स या SIP में निवेश करें, जहां रिटर्न स्टेबल हैं।
ट्रैकिंग : हर महीने घाटा-मुनाफा का रिकॉर्ड रखें और अगर घाटा 20% से ज्यादा हो तो ब्रेक लें।
सोशल मीडिया से दूरी : इंफ्लुएंसर्स के टिप्स पर भरोसा न करें; वे कमीशन कमाते हैं।
राहुल अब रिकवरी मोड में है। उसने ट्रेडिंग ऐप्स डिलीट कर दिए और डेब्ट कंसॉलिडेशन प्लान पर काम कर रहा है। लेकिन उसकी कहानी लाखों युवाओं के लिए सबक है कि F&O अमीरी का शॉर्टकट नहीं, बल्कि बर्बादी का रास्ता हो सकता है। अगर आप भी ट्रेडिंग में हैं, तो अभी संभल जाएं।
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