“2026 में सोने की कीमतें औसतन 4,400 से 5,055 डॉलर प्रति औंस रह सकती हैं, जबकि चांदी 60 से 85 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है। भारत में सोना 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 2.5 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक जा सकती है। प्रमुख फैक्टर्स में भू-राजनीतिक तनाव, केंद्रीय बैंक खरीदारी और औद्योगिक मांग शामिल हैं।”
विश्लेषकों के अनुसार, 2026 में सोने और चांदी की कीमतों में तेजी बनी रह सकती है, क्योंकि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएं बढ़ रही हैं। HSBC के अनुमान से सोना पहले छमाही में 5,050 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है, लेकिन दूसरे छमाही में सुधार संभव है। Bank of America ने 5,000 डॉलर का लक्ष्य रखा है, जबकि J.P. Morgan का औसत अनुमान 4,400 से 5,055 डॉलर है। भारत में MCX पर सोना 1.35 लाख से बढ़कर 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक जा सकता है।
चांदी के लिए Citigroup ने 60 से 72 डॉलर प्रति औंस का औसत अनुमान दिया है, जबकि UBS ने 85 डॉलर तक की संभावना जताई है। औद्योगिक मांग से चांदी 100 डॉलर तक छू सकती है, और भारत में कीमत 2 लाख से 2.5 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच सकती है।
वर्तमान और अनुमानित कीमतें (जनवरी 2026 आधार पर)
| धातु | वर्तमान कीमत (INR) | 2026 अंत तक अनुमान (INR) | अंतरराष्ट्रीय अनुमान (USD/औंस) |
|---|---|---|---|
| सोना (10 ग्राम) | 1,38,875 | 1,50,000 से ऊपर | 4,400 से 5,400 |
| चांदी (1 किग्रा) | 2,42,100 | 2,50,000 से ऊपर | 60 से 85 |
ये अनुमान वैश्विक मांग और आपूर्ति पर आधारित हैं, जहां सोने की केंद्रीय बैंक खरीदारी 2026 में 500 टन से अधिक रह सकती है।
प्रमुख फैक्टर्स पर नजर
भू-राजनीतिक जोखिम : अमेरिका-चीन व्यापार तनाव और मध्य पूर्व संकट से सुरक्षित निवेश के रूप में सोना मजबूत होगा। तर्रिफ अनिश्चितता से कीमतें 10-15% बढ़ सकती हैं।
औद्योगिक मांग : चांदी की AI और सोलर एनर्जी सेक्टर में मांग 20% बढ़ सकती है, जिससे कमी हो सकती है। सिल्वर डेफिसिट 2026 में 100 मिलियन औंस तक पहुंच सकता है।
मुद्रास्फीति और ब्याज दरें : फेडरल रिजर्व की दरें अगर 3% से नीचे रहें, तो सोना-चांदी में निवेश बढ़ेगा। उभरते बाजारों में मुद्रास्फीति 5% से ऊपर रहने से मांग मजबूत होगी।
केंद्रीय बैंक और ETF : RBI समेत एशियाई बैंक सोना रिजर्व बढ़ा रहे हैं, जबकि ETF inflows 2026 में 300 टन तक हो सकते हैं।
आपूर्ति बाधाएं : खनन उत्पादन स्थिर रहने से कीमतें ऊंची रहेंगी, खासकर चांदी में जहां निर्यात नियंत्रण प्रभावी हैं।
निवेशकों को इन फैक्टर्स पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि volatility 20-30% रह सकती है। सोना अगर 4,000 डॉलर से नीचे गिरे, तो खरीदारी का मौका बनेगा, जबकि चांदी 70 डॉलर पर सपोर्ट मिल सकता है।
Disclaimer: यह समाचार, रिपोर्ट, टिप्स और स्रोतों पर आधारित है।






