“आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में एमएसएमई सेक्टर को भारत की आर्थिक वृद्धि का मुख्य आधार बताया गया है, जहां यह 31.1% जीडीपी, 35.4% मैन्युफैक्चरिंग और 48.58% निर्यात में योगदान देता है। हालांकि, 8.1 लाख करोड़ रुपये की देरी से भुगतान और औपचारिक कर्ज की कमी बड़ी बाधाएं हैं, जिसके लिए कैश-फ्लो आधारित लेंडिंग और डिजिटल सॉल्यूशंस की सिफारिश की गई है।”
एमएसएमई सेक्टर की भूमिका और योगदान
एमएसएमई सेक्टर भारत की अर्थव्यवस्था में रीढ़ की हड्डी की तरह काम करता है, जहां 7.47 करोड़ से अधिक उद्यम 32.82 करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं। कृषि के बाद यह दूसरा सबसे बड़ा रोजगार सृजनकर्ता है। सर्वेक्षण में उल्लेख किया गया है कि एमएसएमई 35.4% मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट, 48.58% निर्यात और कुल जीडीपी का 31.1% हिस्सा संभालते हैं। हाल के वर्षों में इस सेक्टर में क्रेडिट ग्रोथ में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, जहां 2025 में शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंकों से एमएसएमई को मिलने वाला क्रेडिट 21.8% बढ़ा, जबकि 2024 में यह वृद्धि 13% थी। कुल बैंक क्रेडिट ग्रोथ भी 2025 में 14.5% तक पहुंची, जो 2024 के 11.2% से अधिक है।
यह सेक्टर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की गति को बढ़ावा दे रहा है, जहां क्रेडिट फ्लो में एमएसएमई की हिस्सेदारी बड़े उद्योगों से अधिक तेजी से बढ़ रही है। उदाहरण के लिए, मैन्युफैक्चरर्स को मिलने वाला क्रेडिट 2022 के 7 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2025 में 21 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जबकि रिटेल सेक्टर में यह दोगुना से अधिक बढ़ा है। औपचारिक फाइनेंसिंग चैनलों की ओर शिफ्ट भी तेज हुई है, जहां मैन्युफैक्चरिंग एस्टेब्लिशमेंट्स में औपचारिक फाइनेंसिंग का प्रतिशत 2021-22 के 48% से बढ़कर 2023-24 में 51% हो गया है।
कर्ज पहुंच की चुनौतियां
एमएसएमई सेक्टर में औपचारिक क्रेडिट की पहुंच अभी भी एक बड़ी बाधा बनी हुई है, खासकर माइक्रो एंटरप्राइजेज के लिए। वर्ल्ड बैंक की फाइनेंशियल सेक्टर असेसमेंट रिपोर्ट (2025) के अनुसार, 27% एमएसएमई फाइनेंस को अपनी सबसे बड़ी समस्या मानते हैं। सीमित कोलैटरल और डॉक्यूमेंटेशन की कमी के कारण कई माइक्रो उद्यमी औपचारिक बैंकिंग से वंचित रह जाते हैं। सर्वेक्षण में सुझाव दिया गया है कि कैश-फ्लो आधारित लेंडिंग को बढ़ावा दिया जाए, जो पहली बार कर्ज लेने वालों और छोटे उद्यमियों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
डिजिटल इंटीग्रेशन बढ़ने के बावजूद, क्रेडिट फुटप्रिंट्स का विस्तार सीमित है। सरकार ने कई कदम उठाए हैं, जैसे TReDS इकोसिस्टम का विस्तार, कॉरपोरेट ऑनबोर्डिंग थ्रेशोल्ड को कम करना और ONDC तथा TEAM इनिशिएटिव के माध्यम से डिजिटल कॉमर्स इंटीग्रेशन को तेज करना। TEAM इनिशिएटिव का लक्ष्य 5 लाख एमएसएमई को ऑनबोर्ड करना है, जो क्रेडिट एक्सेस को आसान बनाएगा। इसके अलावा, डिजिटल लेंडिंग पार्टनरशिप्स को स्केल अप करने की जरूरत पर जोर दिया गया है, ताकि समय पर और किफायती फाइनेंस उपलब्ध हो सके।
भुगतान में देरी की समस्या
| एमएसएमई क्रेडिट ग्रोथ ट्रेंड | 2024 (%) | 2025 (%) |
|---|---|---|
| कुल बैंक क्रेडिट ग्रोथ | 11.2 | 14.5 |
| एमएसएमई क्रेडिट ग्रोथ | 13 | 21.8 |
| बड़े उद्योग क्रेडिट ग्रोथ | कम | एमएसएमई से कम |
एमएसएमई सेक्टर के लिए भुगतान में देरी एक गंभीर चुनौती बनी हुई है, जहां अनुमानित 8.1 लाख करोड़ रुपये देरी से भुगतान में फंसे हुए हैं। यह वर्किंग कैपिटल को प्रभावित करता है और विकास को सीमित करता है। माइक्रो सप्लायर्स विशेष रूप से प्रभावित होते हैं, क्योंकि लिक्विडिटी की कमी से उनके ऑपरेशंस रुक जाते हैं। एमएसएमई अक्सर लीगल रूट से बचते हैं, क्योंकि इससे बिजनेस रिलेशनशिप्स खराब होने का डर रहता है।
सर्वेक्षण में नया ऑनलाइन डिस्प्यूट रिजॉल्यूशन सिस्टम का सुझाव दिया गया है, जो अमिकेबल तरीके से मुद्दों को सुलझाएगा और महत्वपूर्ण बिजनेस टाईज को बचाएगा। TReDS प्लेटफॉर्म का विस्तार इस समस्या को कम करने में मदद कर रहा है, जहां कॉरपोरेट्स को कम थ्रेशोल्ड पर ऑनबोर्ड किया जा रहा है। इसके अलावा, एमएसएमई को डिजिटल कॉमर्स से जोड़ने के लिए ONDC का उपयोग बढ़ाया जा रहा है, जो पेमेंट साइकल को तेज बनाएगा।
मुख्य सुधार सुझाव
कैश-फ्लो लेंडिंग का विस्तार : माइक्रो एंटरप्राइजेज और फर्स्ट-टाइम बॉरोअर्स के लिए क्रेडिट एक्सेस को आसान बनाना।
डिजिटल पार्टनरशिप्स : फिनटेक और बैंकिंग के बीच सहयोग बढ़ाकर किफायती फाइनेंस उपलब्ध कराना।
TReDS और ONDC इंटीग्रेशन : भुगतान देरी को कम करने के लिए कॉरपोरेट ऑनबोर्डिंग को सरल बनाना।
TEAM इनिशिएटिव : 5 लाख एमएसएमई को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से जोड़ना, जो क्रेडिट और पेमेंट फ्लो को बेहतर बनाएगा।
ऑनलाइन डिस्प्यूट रिजॉल्यूशन : लीगल प्रोसेस के बिना मुद्दों को सुलझाना, जो बिजनेस रिलेशनशिप्स को मजबूत रखेगा।
सेक्टर की क्षमता और भविष्य
एमएसएमई सेक्टर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के मौजूदा मोमेंटम का फायदा उठाने की स्थिति में है। सर्वेक्षण में कहा गया है कि क्रेडिट ग्रोथ में एमएसएमई की हिस्सेदारी बड़े उद्योगों से अधिक है, जो इंडस्ट्रियल लेंडिंग को ड्राइव कर रही है। H1FY26 में इंडस्ट्रियल लेंडिंग ग्रोथ में एमएसएमई का योगदान प्रमुख रहा है। हालांकि, ऑपरेशनल फ्रिक्शंस जैसे देरी से भुगतान लिक्विडिटी को प्रभावित कर रहे हैं।
सरकार के हस्तक्षेपों से फाइनेंसिंग गैप्स को कम किया जा रहा है, लेकिन माइक्रो एंटरप्राइजेज के लिए और अधिक इनोवेटिव मेजर्स की जरूरत है। डिजिटल इंटीग्रेशन बढ़ने से फॉर्मल क्रेडिट एक्सेस में सुधार हो रहा है, लेकिन 27% एमएसएमई अभी भी फाइनेंस को मुख्य बाधा मानते हैं। भविष्य में, कैश-फ्लो आधारित मॉडल्स और डिजिटल सॉल्यूशंस सेक्टर को ग्रोथ मल्टीप्लायर बना सकते हैं।
चुनौतियों पर काबू पाने के तरीके
| एमएसएमई योगदान आंकड़े | प्रतिशत/संख्या |
|---|---|
| जीडीपी में हिस्सा | 31.1% |
| मैन्युफैक्चरिंग | 35.4% |
| निर्यात | 48.58% |
| उद्यम संख्या | 7.47 करोड़ |
| रोजगार | 32.82 करोड़ |
एमएसएमई को भुगतान देरी से निपटने के लिए स्ट्रैटेजिक एप्रोच अपनानी चाहिए, जैसे कॉन्ट्रैक्ट्स में क्लियर पेमेंट टर्म्स शामिल करना। कैश-फ्लो मैनेजमेंट के लिए डिजिटल टूल्स का उपयोग बढ़ाना जरूरी है। सर्वेक्षण में एमएसएमई की दुविधा पर जोर दिया गया है, जहां लीगल एक्शन से बिजनेस टाईज खराब होने का डर रहता है। नया ऑनलाइन सिस्टम इस समस्या को हल कर सकता है।
क्रेडिट एक्सेस के लिए, माइक्रो उद्यमी डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म्स का सहारा ले सकते हैं, जहां कोलैटरल की बजाय कैश-फ्लो पर फोकस होता है। TReDS जैसे प्लेटफॉर्म्स से इनवॉइस डिस्काउंटिंग आसान हो गई है। ONDC इंटीग्रेशन से एमएसएमई को बड़े मार्केट्स तक पहुंच मिल रही है, जो पेमेंट साइकल को छोटा करेगा। TEAM इनिशिएटिव से 5 लाख उद्यमों को लाभ मिलेगा, जो डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को बढ़ावा देगा।
Disclaimer: यह न्यूज रिपोर्ट और स्रोतों से प्राप्त टिप्स पर आधारित है।






