“यूएई और अमेरिका ने वाशिंगटन डीसी में क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल के दौरान रेयर अर्थ और महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षित आपूर्ति के लिए फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर किए हैं। भारत के सक्रिय प्रयासों के बाद यह मुस्लिम देश अब वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत करने का बड़ा कदम उठा रहा है, जिससे चीन की 90 प्रतिशत प्रोसेसिंग पर निर्भरता कम होगी और छह महीने में प्रोजेक्ट्स को फाइनेंसिंग मिलने की उम्मीद है।”
यूएई-अमेरिका का ऐतिहासिक फ्रेमवर्क यूएई के निवेश मंत्री मोहम्मद हसन अल-सुवैदी और अमेरिकी अंडर सेक्रेटरी ऑफ स्टेट जैकब हेलबर्ग ने 6 फरवरी 2026 को वाशिंगटन में समझौता किया। फ्रेमवर्क खनन, प्रसंस्करण, रिसाइक्लिंग और डाउनस्ट्रीम प्रोजेक्ट्स पर फोकस करता है। दोनों देश मौजूदा प्रोजेक्ट्स की पहचान करेंगे, फाइनेंसिंग, इक्विटी, ऑफटेक एग्रीमेंट, इंश्योरेंस और रेगुलेटरी सपोर्ट देंगे। साइनिंग के छह महीने के अंदर प्रोजेक्ट्स को फंडिंग मिलेगी और उत्पाद यूएई व अमेरिकी बाजार में डिलीवर होंगे।
रेयर अर्थ क्यों बन गए वैश्विक जंग का मैदान रेर अर्थ एलिमेंट्स (17 धातुएं) इलेक्ट्रिक वाहनों के परमानेंट मैग्नेट, स्मार्टफोन, विंड टर्बाइन, एफ-35 जेट, रडार और सेमीकंडक्टर में जरूरी हैं। बिना इनके आधुनिक तकनीक ठप हो जाती है। चीन की 70 प्रतिशत माइनिंग और 90 प्रतिशत प्रोसेसिंग पर पकड़ ने 2025 में अमेरिका-ट्रंप टैरिफ के जवाब में निर्यात प्रतिबंध लगाए, जिससे वैश्विक ऑटोमेकर्स की चेन हिल गई।
भारत ने पहले ही मोर्चा संभाला भारत ने ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, जाम्बिया, पेरू, जिम्बाब्वे, मोजाम्बिक, मलावी और कोट डी’आइवर के साथ MoU साइन किए। रेयर अर्थ कॉरिडोर बनाने की बजट योजना चल रही है। देश के पास 6.9 मिलियन मीट्रिक टन रिजर्व हैं (दुनिया में तीसरा स्थान) और समुद्री रेत में 35 प्रतिशत मॉनाजाइट डिपॉजिट हैं। IREL और अन्य एजेंसियां प्रोसेसिंग कैपेसिटी बढ़ा रही हैं।
यूएई का स्ट्रैटेजिक दांव यूएई के पास रणनीतिक रिजर्व और लो-कॉस्ट एनर्जी है। यह फ्रेमवर्क उसे खनन हब बनाने का मौका देता है। अमेरिका अपनी इंडस्ट्रियल डिमांड और स्टॉकपाइलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर यूएई के साथ शेयर करेगा। दोनों मिलकर सप्लाई गैप्स को भरेंगे और सहयोगी देशों को भी सप्लाई करेंगे।
अमेरिका का व्यापक प्लान अमेरिका ने पिछले पांच महीनों में 10 और आज 11 देशों (अर्जेंटीना, कुक आइलैंड्स, इक्वाडोर, गिनी, मोरक्को, पैराग्वे, पेरू, फिलीपींस, यूके, यूज्बेकिस्तान, यूएई) के साथ फ्रेमवर्क साइन किए। ट्रंप प्रशासन क्रिटिकल मिनरल्स ट्रेड ब्लॉक बनाने की दिशा में है। सऊदी अरब के साथ रेयर अर्थ रिफाइनरी जॉइंट वेंचर पहले ही चल रहा है।
प्रमुख देशों में रेयर अर्थ रिजर्व (मिलियन मीट्रिक टन, अनुमानित)
| देश | रिजर्व (मिलियन मीट्रिक टन) | 2024 उत्पादन (हजार टन) |
|---|---|---|
| चीन | 44 | 270 |
| ब्राजील | 21 | – |
| वियतनाम | 22 | – |
| भारत | 6.9 | 2.9 |
| ऑस्ट्रेलिया | 3.4 | – |
| रूस | 12 | – |
चीन के होश उड़ाने वाले पहलू ये समझौते चीन की प्रोसेसिंग पर निर्भरता को सीधे चुनौती देते हैं। 2025 के निर्यात कटौती से अमेरिकी ऑटो और डिफेंस सेक्टर में 20-30 प्रतिशत मूल्य वृद्धि हुई थी। अब यूएई जैसा स्थिर, मित्र देश सप्लाई डाइवर्सिफाई करेगा। चीन का स्टॉकपाइलिंग प्लान भी कमजोर पड़ सकता है।
आगे क्या यह फ्रेमवर्क सिर्फ यूएई-अमेरिका का नहीं, बल्कि वैश्विक अलाइंस का हिस्सा है। भारत भी ब्राजील, यूएई और मध्य एशियाई देशों से आगे बातचीत कर रहा है। आने वाले महीनों में फाइनेंसिंग शुरू होते ही रेयर अर्थ की कीमतों में स्थिरता आएगी और चीन की एकाधिकार की कीमत बढ़ेगी।
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