“गौतम अदाणी पर अमेरिकी DOJ और SEC के गंभीर आरोपों के बीच ट्रंप प्रशासन में सॉल्यूशन की कोशिशें नाकाम, भारत-अमेरिका तनाव के चलते केस में कोई राहत नहीं मिली; WSJ रिपोर्ट के बाद OFAC जांच शुरू, Adani Group ने आरोपों को बेबुनियाद बताया।”
गौतम अदाणी को ट्रंप के US ने क्यों किया टारगेट, हिंडनबर्ग से लेकर SEC और WSJ तक; आरोपों से तोड़ने की कोशिश?
अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) और सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) ने नवंबर 2024 में गौतम अदाणी, उनके भतीजे सागर अदाणी और अन्य executives पर करीब 265 मिलियन डॉलर (लगभग 2,200 करोड़ रुपये) की रिश्वतखोरी का आरोप लगाया था। यह मामला Adani Green Energy और Azure Power जैसी कंपनियों को भारत सरकार से सोलर पावर कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए कथित तौर पर भारतीय अधिकारियों को रिश्वत देने से जुड़ा है। आरोप है कि इस स्कीम से Adani Green ने अमेरिकी निवेशकों से 175 मिलियन डॉलर से ज्यादा जुटाए और कुल 3 बिलियन डॉलर से अधिक के लोन व बॉन्ड हासिल किए, जबकि एंटी-ब्राइबरी प्रैक्टिस को गलत तरीके से पेश किया गया।
यह जांच 2022 से चल रही है, लेकिन ट्रंप प्रशासन के आने के बाद (2025 से) Adani पक्ष ने इसे ड्रॉप करवाने की कोशिश की। WSJ ने जून 2025 में रिपोर्ट की कि गौतम अदाणी ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों से संपर्क कर रहे थे ताकि विदेशी रिश्वत (FCPA) के आरोप हटाए जाएं। Adani के प्रतिनिधियों ने हाई-प्रोफाइल अमेरिकी वकीलों की मदद ली, लेकिन भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड टेंशन, टैरिफ और अन्य द्विपक्षीय मुद्दों के कारण कोई डील नहीं हुई। सितंबर 2025 तक रिपोर्ट्स आईं कि प्रयास स्टॉल हो गए हैं।
हिंडनबर्ग रिसर्च ने जनवरी 2023 में Adani Group पर स्टॉक मैनिपुलेशन, अकाउंटिंग फ्रॉड और ऑफशोर कंपनियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया था, जिससे ग्रुप की मार्केट वैल्यू में 150 बिलियन डॉलर से ज्यादा की गिरावट आई। Adani ने इसे “calculated attack” बताया और SEBI ने बाद में कई आरोपों पर क्लीन चिट दी, लेकिन अमेरिकी जांच अलग से चली।
WSJ ने जून 2025 में एक और रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें कहा गया कि अमेरिकी prosecutors जांच कर रहे हैं कि Adani से जुड़ी कंपनियों ने Mundra पोर्ट के जरिए ईरानी ओरिजिन का LPG इंपोर्ट किया, जो अमेरिकी सैंक्शंस का उल्लंघन हो सकता है। ईरान से ऑयल ट्रेड पर ट्रंप ने सख्ती बरती है। फरवरी 2026 में Adani Enterprises ने कन्फर्म किया कि US Office of Foreign Assets Control (OFAC) से रिक्वेस्ट फॉर इंफॉर्मेशन मिला है और कंपनी voluntary talks में है। कंपनी ने कहा कि कोई non-compliance नहीं पाया गया और जांच सिविल है। Adani ने ईरानी LPG इंपोर्ट बंद कर दिया है और जांच में फुल कोऑपरेशन का दावा किया।
SEC ने 2024 के सिविल केस में summons सर्व करने के लिए भारत सरकार से मदद मांगी, लेकिन प्रोसीजरल इश्यूज के कारण देरी हुई। जनवरी 2026 में SEC ने कोर्ट से alternate तरीके (ईमेल, US लॉ फर्म्स) से सर्व करने की परमिशन मांगी, जिससे Adani ग्रुप के शेयर्स 3-14% तक गिरे और 12.5 बिलियन डॉलर मार्केट कैप लॉस हुआ। बाद में फरवरी 2026 में Adani पक्ष ने नोटिस accept करने पर सहमति जताई और 90 दिनों में रिस्पॉन्स फाइल करने का समय मिला। गौतम अदाणी ने Sullivan & Cromwell LLP के Robert Giuffra Jr. (ट्रंप के केस में भी शामिल) जैसे प्रमुख वकीलों को हायर किया है।
Adani Group ने सभी आरोपों को बार-बार “baseless” और “unfounded” बताया है। कंपनी का कहना है कि वह world-class compliance फॉलो करती है और सभी लीगल रिसोर्स से बचाव करेगी। यह केस भारत-अमेरिका रिलेशंस पर असर डाल रहा है, खासकर ट्रेड और टैरिफ मुद्दों के बीच।
| प्रमुख आरोप और घटनाक्रम | विवरण | प्रभाव |
|---|---|---|
| हिंडनबर्ग रिपोर्ट (जनवरी 2023) | स्टॉक मैनिपुलेशन, फ्रॉड आरोप | 150 बिलियन डॉलर वैल्यू लॉस |
| DOJ/SEC चार्जेस (नवंबर 2024) | 265 मिलियन डॉलर रिश्वत स्कीम, फ्रॉड | क्रिमिनल और सिविल केस |
| WSJ रिपोर्ट (जून 2025) | ईरान सैंक्शंस उल्लंघन, ट्रंप से डील ट्राई | OFAC जांच शुरू |
| SEC summons प्रयास (2025-2026) | भारत से सहयोग न मिलने पर alternate सर्व | शेयर्स गिरावट |
| फरवरी 2026 अपडेट | OFAC से talks, नोटिस accept | जांच जारी |
यह मामला Adani Group की ग्लोबल एक्सपैंशन और भारत की इंटरनेशनल इमेज पर लंबा असर डाल सकता है।
Disclaimer: यह लेख उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी, रिपोर्ट्स और घटनाक्रमों पर आधारित है। यह निवेश सलाह नहीं है।






