ब्राजील, दुनिया का सबसे बड़ा चिकन निर्यातक, भारत में अपने चिकन के आयात पर लगे 100% टैरिफ (कटेड चिकन पर) और 30% (पूरे चिकन पर) को कम करने या शून्य करने की मांग कर रहा है। ब्राजीलियन डेलिगेशन ने भारत में व्यापार वार्ता के दौरान स्पेसिफिक कोटा के साथ रिड्यूस्ड या जीरो टैरिफ वाली व्यवस्था का प्रस्ताव दिया है। बदले में ब्राजील भारतीय अनार और मैकाडेमिया नट्स जैसे फलों को बाजार देने को तैयार है। 2025 में ब्राजील ने भारत को सिर्फ 2.47 टन चिकन निर्यात किया, जबकि कुल निर्यात में UAE जैसे देशों को लाखों टन भेजा। यदि टैरिफ कम हुआ तो भारतीय बाजार में सस्ता ब्राजीलियन चिकन आ सकता है, लेकिन घरेलू पोल्ट्री उद्योग पर असर और किसानों की चिंता बनी रहेगी।
भारतीय बाजार में ब्राजीलियन चिकन की एंट्री की राह में सबसे बड़ी बाधा टैरिफ
भारत में चिकन आयात पर मौजूदा टैरिफ संरचना बेहद सख्त है। कटेड चिकन (चिकन कट्स) पर 100% इंपोर्ट ड्यूटी लगती है, जबकि पूरे चिकन पर 30%। यह दरें ब्राजील जैसे बड़े निर्यातक के लिए बाजार में प्रवेश लगभग असंभव बना देती हैं। ब्राजीलियन एनिमल प्रोटीन एसोसिएशन (ABPA) ने इसे प्राथमिकता बताते हुए टैरिफ रिडक्शन की मांग की है।
हाल ही में ब्राजील की एक ट्रेड डेलिगेशन भारत पहुंची, जहां कृषि मंत्रालय और ABPA ने द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने पर चर्चा की। ब्राजील ने प्रस्ताव दिया कि स्पेसिफिक कोटा बनाया जाए, जिसमें ब्राजीलियन चिकन को रिड्यूस्ड या जीरो टैरिफ पर आयात की अनुमति दी जाए। यह कदम भारत-ब्राजील व्यापार को मौजूदा 15 बिलियन डॉलर से बढ़ाकर 20 बिलियन डॉलर तक ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ब्राजील दुनिया का नंबर 1 पोल्ट्री निर्यातक है। 2025 में उसने कुल मिलाकर रिकॉर्ड स्तर पर चिकन एक्सपोर्ट किया, लेकिन भारत में उसका शेयर नगण्य रहा। आंकड़ों के मुताबिक 2025 में भारत को सिर्फ 2.47 टन चिकन भेजा गया, जबकि UAE को अकेले 479,900 टन निर्यात हुआ। यह अंतर टैरिफ बैरियर की वजह से है।
ब्राजील क्या ऑफर कर रहा है?
ब्राजील सिर्फ टैरिफ राहत नहीं मांग रहा, बल्कि बदले में भारतीय उत्पादों को बाजार देने को तैयार है। खासतौर पर भारतीय अनार (pomegranates) और मैकाडेमिया नट्स को ब्राजील में आसान एंट्री देने का वादा किया गया है। इसके अलावा guandu beans और yerba mate जैसे ब्राजीलियन उत्पादों के लिए भी भारत से रिसीप्रोकल एक्सेस की बात चल रही है।
यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब वैश्विक व्यापार में बदलाव हो रहे हैं। अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ के कारण ब्राजील अपने एक्सपोर्ट मार्केट को डाइवर्सिफाई करना चाहता है। भारत जैसे बड़े और बढ़ते उपभोक्ता बाजार में एंट्री उसके लिए रणनीतिक महत्व रखती है।
भारतीय पोल्ट्री इंडस्ट्री पर क्या असर पड़ सकता है?
भारत में पोल्ट्री सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। ब्रॉयलर चिकन की घरेलू उत्पादन क्षमता लाखों टन सालाना है और कीमतें उपभोक्ताओं के लिए किफायती बनी हुई हैं। यदि ब्राजीलियन चिकन जीरो या बहुत कम टैरिफ पर आया तो:
प्रोसेस्ड और फ्रोजेन चिकन सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है।
छोटे और मध्यम किसानों पर दबाव आ सकता है, क्योंकि ब्राजीलियन चिकन बड़े पैमाने पर सस्ता उत्पादन करता है।
उपभोक्ताओं को सस्ते विकल्प मिल सकते हैं, खासकर शहरी मिडिल क्लास में जहां प्रोसेस्ड मीट की डिमांड बढ़ रही है।
हालांकि भारत ने संवेदनशील सेक्टर्स जैसे पोल्ट्री को FTA में प्रोटेक्ट करने की नीति अपनाई है। EU-India FTA में भी पोल्ट्री को संवेदनशील रखा गया है, जिससे बड़े पैमाने पर आयात कोटा नहीं दिए गए। ब्राजील के साथ भी यही रुख अपनाया जा सकता है।
टैरिफ संरचना की तुलना
क्या भारतीय बाजार में ब्राजीलियन चिकन आएगा?
| उत्पाद प्रकार | मौजूदा टैरिफ (भारत में आयात पर) | ब्राजील का प्रस्ताव | संभावित प्रभाव |
|---|---|---|---|
| चिकन कट्स | 100% | रिड्यूस्ड या 0% (कोटा आधारित) | सस्ता प्रोसेस्ड चिकन बाजार में |
| पूरा चिकन | 30% | रिड्यूस्ड या 0% (कोटा आधारित) | सीमित प्रभाव, लेकिन मात्रा बढ़ सकती है |
| अन्य पोल्ट्री प्रोडक्ट्स | उच्च | वार्ता में शामिल | घरेलू कीमतों पर दबाव |
फिलहाल टैरिफ रिडक्शन की बात चल रही है, लेकिन भारत की घरेलू पोल्ट्री इंडस्ट्री और किसानों के हितों को देखते हुए बड़ा बदलाव मुश्किल लगता है। ब्राजील का प्रस्ताव कोटा आधारित है, यानी सीमित मात्रा में आयात संभव हो सकता है। यदि द्विपक्षीय व्यापार समझौता आगे बढ़ा तो 2026 में कुछ बदलाव दिख सकते हैं।
भारतीय उपभोक्ता सस्ते और बेहतरीन क्वालिटी के चिकन की तलाश में रहते हैं। ब्राजीलियन चिकन अपनी गुणवत्ता और कीमत के लिए जाना जाता है, लेकिन स्वास्थ्य मानकों, हलाल सर्टिफिकेशन और लोकल प्रेफरेंस जैसे फैक्टर भी निर्णायक होंगे।






