पूर्व तटीय रेलवे (ECoR) ने वित्त वर्ष 2025-26 में मात्र 294 दिनों में 23,000 करोड़ रुपये की मूल फ्रेट कमाई हासिल की, जो पिछले वर्ष की तुलना में 27 दिन पहले है। यह जोन फ्रेट लोडिंग में भारतीय रेलवे में नंबर वन बना, जिसमें 209.97 मिलियन टन माल ढोया गया, जो 11.31% की वृद्धि दर्शाता है। कोयला, लौह अयस्क और स्टील उत्पाद मुख्य कमोडिटी रहे, जो औद्योगिक विकास को बढ़ावा दे रहे हैं।
पूर्व तटीय रेलवे (ECoR) ने भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है, जहां फ्रेट ट्रांसपोर्ट के माध्यम से कमाई के आंकड़े अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गए हैं। इस जोन ने अपनी दक्षता और रणनीतिक योजना के बल पर माल ढुलाई से जुड़े लक्ष्यों को समय से पहले पूरा किया, जिससे राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में रेलवे की भूमिका और मजबूत हुई है। ECoR के प्रदर्शन से साफ है कि माल ढुलाई क्षेत्र में नवाचार और कर्मचारियों की मेहनत कैसे बड़े परिणाम दे सकती है।
फ्रेट कमाई के मामले में ECoR ने दिसंबर तक 21,749.38 करोड़ रुपये का आंकड़ा छुआ, जो पिछले वर्ष के 19,482.63 करोड़ से काफी अधिक है। इस वृद्धि का मुख्य कारण बेहतर ऑपरेशनल मॉनिटरिंग और इनोवेटिव प्रैक्टिसेज रही हैं, जिन्होंने लोडिंग क्षमता को बढ़ाया। जोन ने कुल मूल कमाई में 11.21% की ग्रोथ दर्ज की, जिसमें पैसेंजर और संड्री इनकम भी शामिल हैं, लेकिन फ्रेट ने मुख्य भूमिका निभाई। यह उपलब्धि रेलवे के फ्रेट-लेड ग्रोथ स्ट्रैटेजी को मजबूती प्रदान करती है, जहां माल ढुलाई को प्राथमिकता दी जा रही है।
ECoR की सफलता के पीछे मुख्य कमोडिटी की भूमिका अहम रही। कोयला, जो इस जोन का प्रमुख उत्पाद है, ने लोडिंग में बड़ा योगदान दिया। ओडिशा और छत्तीसगढ़ के खनन क्षेत्रों से निकलने वाला कोयला तालचेर और अन्य स्टेशनों से ढोया गया, जिससे पावर प्लांट्स और इंडस्ट्रीज को सप्लाई सुनिश्चित हुई। इसके अलावा, लौह अयस्क और स्टील प्रोडक्ट्स ने भी कमाई को बढ़ावा दिया, खासकर पैराडीप पोर्ट से जुड़े एक्सपोर्ट्स के कारण। इन कमोडिटी की ढुलाई ने न केवल राजस्व बढ़ाया, बल्कि लॉजिस्टिक्स चेन को मजबूत किया, जिससे इंडस्ट्रीज की उत्पादकता में सुधार आया।
मुख्य कमोडिटी और लोडिंग आंकड़े
ECoR ने विभिन्न कमोडिटी में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। नीचे दी गई तालिका पिछले वर्ष की तुलना में वर्तमान वर्ष के आंकड़ों को दर्शाती है (मिलियन टन में):
| कमोडिटी | 2024-25(दिसंबरतक) | 2025-26(दिसंबरतक) | वृद्धि(%) |
|---|---|---|---|
| कोयला | 108.5 | 119.6 | 10.23 |
| लौहअयस्क | 28.4 | 32.5 | 14.44 |
| स्टीलप्रोडक्ट्स | 14.2 | 16.0 | 12.68 |
| रॉमटेरियलफॉरस्टील | 6.8 | 7.7 | 13.24 |
| अन्य(फर्टिलाइजर,सीमेंटआदि) | 30.74 | 34.17 | 11.16 |
| कुल | 188.64 | 209.97 | 11.31 |
यह तालिका स्पष्ट करती है कि कोयला ने सबसे अधिक योगदान दिया, जो ECoR के भौगोलिक लाभ से जुड़ा है। ओडिशा के माइनिंग हब्स जैसे तालचेर और अंगुल से कोयला ढुलाई ने रिकॉर्ड तोड़े, जबकि पैराडीप और विशाखापत्तनम पोर्ट्स से लौह अयस्क के एक्सपोर्ट ने कमाई को बूस्ट किया। इन आंकड़ों से पता चलता है कि जोन ने माइनिंग सेक्टर के साथ समन्वय बढ़ाकर लोडिंग को ऑप्टिमाइज किया।
फ्रेट लोडिंग में ECoR की लीडरशिप भारतीय रेलवे के अन्य जोन्स के लिए उदाहरण है। दिसंबर तक 209.97 मिलियन टन की लोडिंग के साथ यह जोन नंबर वन बना, जो पिछले वर्ष के 188.64 मिलियन टन से 21.33 मिलियन टन अधिक है। इस ग्रोथ का श्रेय कर्मचारियों की डेडिकेटेड टीमवर्क को जाता है, जिन्होंने 24/7 मॉनिटरिंग के जरिए बाधाओं को दूर किया। उदाहरण के लिए, नए फ्रेट कॉरिडोर और डेडिकेटेड रूट्स का उपयोग बढ़ाया गया, जिससे ट्रेन स्पीड और टर्नअराउंड टाइम में सुधार हुआ।
सफलता के प्रमुख कारण
ऑपरेशनल इनोवेशन : ECoR ने डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम्स को अपनाया, जिससे रीयल-टाइम मॉनिटरिंग संभव हुई और डिले कम हुए।
कर्मचारी प्रयास : फ्रंटलाइन स्टाफ ने अतिरिक्त शिफ्ट्स और ट्रेनिंग के जरिए क्षमता बढ़ाई, जिससे सेफ्टी और एफिशिएंसी दोनों में सुधार आया।





