“मुख्य आर्थिक सलाहकार ने STT में बढ़ोतरी को सट्टेबाजी से बचाने का कदम बताया, जहां फ्यूचर्स पर टैक्स 0.02% से बढ़कर 0.05% और ऑप्शंस पर 0.1% से 0.15% हो गया; इससे रिटेल ट्रेडर्स के मार्जिन पर असर पड़ेगा, लेकिन सिस्टेमिक रिस्क कम होगा, जबकि आर्बिट्रेज फंड्स में रिटर्न 0.5% तक गिर सकता है।”
बजट 2026 में सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोतरी की घोषणा के बाद बाजार में हलचल मच गई, लेकिन मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंथा नागेश्वरन ने इसे सट्टेबाजी को रोकने का रणनीतिक कदम करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फैसला रिटेल इनवेस्टर्स को अंधाधुंध ट्रेडिंग से बचाने के लिए लिया गया है, जहां डेरिवेटिव्स मार्केट में स्पेकुलेटिव एक्टिविटी ने सिस्टेमिक रिस्क को बढ़ावा दिया है। नागेश्वरन के अनुसार, पिछले दो वर्षों में F&O ट्रेडिंग वॉल्यूम 300% से अधिक बढ़ा, जिससे युवा ट्रेडर्स को भारी नुकसान हुआ और अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ा।
इस बढ़ोतरी से फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स पर STT 0.02% से बढ़कर 0.05% हो गया, जबकि ऑप्शंस प्रीमियम और एक्सरसाइज पर यह 0.1% से 0.15% तक पहुंच गया। रेवेन्यू सेक्रेटरी अरविंद श्रीवास्तव ने भी इसकी पुष्टि की, कहा कि यह बदलाव स्पेकुलेटिव ट्रेडिंग को डिस्करेज करने और टैक्स रेवेन्यू बढ़ाने का दोहरा उद्देश्य रखता है। आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में F&O सेगमेंट में रिटेल पार्टिसिपेशन 70% से ऊपर पहुंच गया, लेकिन 80% ट्रेडर्स को नुकसान हुआ, जिससे SEBI की चिंताएं बढ़ीं।
ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स जैसे Zerodha, Groww और Angel One पर इसका सीधा असर पड़ेगा, जहां हाई-वॉल्यूम, लो-मार्जिन मॉडल्स प्रभावित होंगे। Zerodha के CEO नितिन कामथ ने अनुमान लगाया कि ट्रेडिंग वॉल्यूम 20-30% तक गिर सकता है, क्योंकि बढ़ी हुई लागत से शॉर्ट-टर्म ट्रेड्स अनप्रॉफिटेबल हो जाएंगे। इसी तरह, आर्बिट्रेज फंड्स में रिटर्न पर 0.5% का प्रभाव पड़ेगा, जैसा कि Capitalmind के CEO दीपक शेनॉय ने बताया। उन्होंने कहा कि पतले मार्जिन्स पर चलने वाले फंड्स अब ज्यादा कॉस्ट-इफिशिएंट स्ट्रैटेजी अपनाने को मजबूर होंगे।
| STT में बदलाव | पुरानी दर (%) | नई दर (%) | लागू तिथि | संभावित असर |
|---|---|---|---|---|
| फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स | 0.02 | 0.05 | 1 अप्रैल 2026 | हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग में 150% तक लागत बढ़ोतरी, वॉल्यूम में 25% गिरावट का अनुमान |
| ऑप्शंस प्रीमियम | 0.1 | 0.15 | 1 अप्रैल 2026 | ऑप्शंस ट्रेडर्स के ब्रेकईवन पॉइंट में 25 पॉइंट्स का इजाफा, स्पेकुलेटिव स्ट्रैटेजी प्रभावित |
| ऑप्शंस एक्सरसाइज | 0.125 | 0.15 | 1 अप्रैल 2026 | एक्सपायरी डे ट्रेडिंग महंगी, रिटेल इनवेस्टर्स को लॉन्ग-टर्म इनवेस्टमेंट की ओर शिफ्ट |
यह बदलाव केवल F&O पर लागू होगा, जबकि अन्य सिक्योरिटीज पर STT रेट्स अपरिवर्तित रहेंगे। पूर्व CBDT मेंबर ने चिंता जताई कि यह स्पेकुलेशन को पूरी तरह रोक नहीं पाएगा, बल्कि मार्जिन्स को हिट करेगा, लेकिन नागेश्वरन ने जोर दिया कि यह SEBI की रेगुलेटरी चिंताओं से जुड़ा है। SEBI के डेटा से पता चलता है कि 2025 में डेरिवेटिव्स मार्केट का टर्नओवर 500 लाख करोड़ रुपये पार कर गया, जिसमें 90% स्पेकुलेटिव था। इससे सिस्टेमिक रिस्क बढ़ा, क्योंकि मार्केट क्रैश में रिटेल इनवेस्टर्स सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।
शंकर शर्मा जैसे मार्केट एक्सपर्ट्स ने इस फैसले का स्वागत किया, कहा कि F&O युवाओं के लिए ‘डिस्ट्रक्टिव’ साबित हो रहा है, जहां औसत नुकसान 1 लाख रुपये प्रति ट्रेडर रहा। उन्होंने सुझाव दिया कि ट्रेडर्स अब हेजिंग स्ट्रैटेजी पर फोकस करें, बजाय शॉर्ट-टर्म गैंबलिंग के। इसी क्रम में, सरकार ने MAT स्ट्रक्चर में भी बदलाव किए, जहां MAT को फाइनल टैक्स बना दिया गया और रेट 15% से घटाकर 14% कर दिया, लेकिन STT का फोकस स्पेकुलेशन पर रहा।
ट्रेडर्स के लिए सलाह देते हुए, एक्सपर्ट्स ने कहा कि बढ़ी STT से बचने के लिए लॉन्ग-टर्म इक्विटी इनवेस्टमेंट्स को प्राथमिकता दें, जहां LTCG टैक्स 12.5% है। आर्बिट्रेज ऑपर्चुनिटीज अब कम होंगी, इसलिए डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो बनाएं। Moneylife रिपोर्ट्स के अनुसार, रिटेल ट्रेडिंग सर्ज ने SEBI को अलर्ट किया, जहां 2025 में 1 करोड़ नए डीमैट अकाउंट्स खुले, लेकिन 60% में F&O फोकस था।
इसके अलावा, बायबैक टैक्सेशन में बदलाव से कॉरपोरेट प्रमोटर्स पर 22% इफेक्टिव टैक्स लगेगा, जो टैक्स आर्बिट्रेज को रोकने का कदम है। कुल मिलाकर, यह बजट स्पेकुलेटिव ट्रेडिंग को रेगुलेट करने की दिशा में बड़ा स्टेप है, जहां CEA का खुलासा बाजार की दिशा तय करेगा।
ट्रेडर्स के लिए टिप्स : F&O में एंट्री से पहले रिस्क कैलकुलेटर यूज करें; STT कैलकुलेशन में नई दरें शामिल करें।
मार्केट इंपैक्ट : NSE और BSE पर F&O वॉल्यूम में तत्काल 10% गिरावट दर्ज, लेकिन इक्विटी कैश सेगमेंट में 5% उछाल।
एक्सपर्ट व्यू : पूर्व CBDT मेंबर ने कहा कि STT हाइक मार्जिन्स हिट करेगा, लेकिन स्पेकुलेशन पर लंबे समय में असर दिखेगा।
गवर्नमेंट का उद्देश्य : टैक्स रेवेन्यू में 20% इजाफा अनुमानित, साथ ही युवा इनवेस्टर्स को फाइनेंशियल डिसिप्लिन सिखाना।
| प्रमुख एक्सपर्ट्स की राय | नाम | राय का सार |
|---|---|---|
| वी अनंथा नागेश्वरन (CEA) | मुख्य आर्थिक सलाहकार | STT बढ़ोतरी सट्टेबाजी रोकने और सिस्टेमिक रिस्क कम करने का कदम |
| अरविंद श्रीवास्तव (रेवेन्यू सेक्रेटरी) | रेवेन्यू सेक्रेटरी | स्पेकुलेटिव ट्रेडिंग को डिस्करेज, टैक्स रेवेन्यू बढ़ाना उद्देश्य |
| दीपक शेनॉय (Capitalmind CEO) | CEO | आर्बिट्रेज फंड्स में 0.5% रिटर्न गिरावट, रिटेल पर कम असर |
| नितिन कामथ (Zerodha CEO) | CEO | ट्रेडिंग वॉल्यूम 20-30% गिर सकता है |
| शंकर शर्मा (मार्केट एक्सपर्ट) | एक्सपर्ट | F&O युवाओं के लिए डिस्ट्रक्टिव, STT हाइक का स्वागत |
यह फैसला नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 के साथ जुड़ा है, जहां टैक्स स्ट्रक्चर को सरल बनाया गया, लेकिन STT जैसे बदलाव स्पेकुलेशन पर फोकस रखते हैं।
Disclaimer: यह एक न्यूज रिपोर्ट है, जो विभिन्न स्रोतों, रिपोर्ट्स और टिप्स पर आधारित है।






