“वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कल अपना नौवां लगातार बजट पेश करेंगी, जिसमें कैपेक्स पर जोर, टैक्स राहत, एमएसएमई सपोर्ट और निर्यात बढ़ावा प्रमुख होंगे। जीडीपी ग्रोथ 6.8-7.2% अनुमानित, फिस्कल डेफिसिट 4.3-4.4% लक्ष्य। इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और रोजगार पर फोकस के साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की भूमिका मजबूत होगी, अमेरिकी टैरिफ्स से प्रभावित सेक्टर्स को राहत संभावित।”
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कल संसद में वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेंगी, जो भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए रणनीतिक दिशा तय करेगा। इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 के अनुसार, जीडीपी ग्रोथ 6.8 से 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो वैश्विक मंदी के बीच भारत को मजबूत स्थिति प्रदान करता है। फिस्कल डेफिसिट को 4.3 प्रतिशत तक सीमित रखने का लक्ष्य रखा गया है, जो FY26 के 4.4 प्रतिशत से थोड़ा कम होगा। कैपिटल एक्सपेंडिचर को बढ़ाकर इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश संभावित है, जो रोजगार सृजन को गति देगा।
एमएसएमई सेक्टर के लिए क्रेडिट गारंटी कवर को दोगुना करने की योजना है, जहां माइक्रो एंटरप्राइजेज के लिए लोन गारंटी 5 करोड़ से बढ़कर 10 करोड़ रुपये हो सकती है। स्टार्टअप्स को 10 से 20 करोड़ रुपये तक की गारंटी मिलने की उम्मीद है, जो इनोवेशन को बढ़ावा देगी। निर्यातकों के लिए टर्म लोन पर 20 करोड़ रुपये तक की गारंटी उपलब्ध होगी, विशेषकर टेक्सटाइल्स जैसे सेक्टर्स में जहां अमेरिकी टैरिफ्स से 10-15 प्रतिशत प्रभाव पड़ा है।
इनकम टैक्स में राहत के रूप में स्टैंडर्ड डिडक्शन को 50,000 रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये करने का प्रस्ताव है, जो मिडिल क्लास को महंगाई से राहत देगा। न्यू टैक्स रिजीम में स्लैब्स को सरल बनाया जाएगा, जहां 12 लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। टीडीएस रूल्स को रेशनलाइज किया जाएगा, जिससे नॉन-रेजिडेंट्स को टैक्स सर्टेनिटी मिलेगी। टैक्स कोड को 819 सेक्शंस से घटाकर 536 करने से क्लैरिटी बढ़ेगी।
सेक्टर-वाइज फोकस में इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर रहेगा, जहां रेलवे बजट में मामूली बढ़ोतरी संभावित है। डिफेंस कैपेक्स को 1.8 लाख करोड़ से बढ़ाकर 3.3 लाख करोड़ रुपये तक ले जाया जा सकता है, जिसमें इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट शामिल होगा। रिन्यूएबल एनर्जी में ग्रीन हाइड्रोजन के लिए इंसेंटिव्स दिए जाएंगे, जो क्लाइमेट-फ्रेंडली डेवलपमेंट को सपोर्ट करेगा। ईवी सेक्टर में बैटरी मैन्युफैक्चरिंग के लिए पीएलआई स्कीम का विस्तार होगा, जिससे 22 लाख रोजगार सृजन का अनुमान है।
एग्रीकल्चर और रूरल इकोनॉमी में किसानों की आय बढ़ाने के लिए फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स स्थापित की जाएंगी, जैसे बिहार में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फूड टेक्नोलॉजी। एमजीएनआरईजीए को वीबी जी-आरएएम-जी स्कीम से रिप्लेस करने की चर्चा है, जो ग्रामीण जॉब्स को ज्यादा कुशल बनाएगी। यूथ स्किलिंग के लिए 50 हजार अटल टिंकरिंग लैब्स और 5 नेशनल सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस स्थापित होंगे, जो एआई और ग्लोबल पार्टनरशिप्स पर आधारित होंगे।
इंश्योरेंस सेक्टर में 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति से मार्केट गैप्स को भरा जाएगा, जबकि गिफ्ट सिटी को ग्लोबल फाइनेंशियल हब बनाने के लिए टैक्स क्लैरिटी प्रदान की जाएगी। टियर-2 सिटीज में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स के लिए नेशनल फ्रेमवर्क बनेगा, जो एम्प्लॉयमेंट को बढ़ाएगा। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म वर्कर्स को ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन और पीएम जन आरोग्या योजना के तहत हेल्थकेयर मिलेगा।
वैश्विक परिदृश्य में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण है, जहां यूएस टैरिफ्स से प्रभावित सेक्टर्स जैसे टेक्सटाइल्स को सपोर्ट मिलेगा। यूके और यूएस जैसे देश भारत के बजट पर नजर रखेंगे, क्योंकि भारत की 7.3 प्रतिशत जीडीपी ग्रोथ वैश्विक औसत से ऊपर है। इकोनॉमिक सर्वे में ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस के 10-20 प्रतिशत रिस्क की चेतावनी दी गई है, जिसके खिलाफ बजट में बफर रिफॉर्म्स शामिल होंगे।
पीएम स्वनिधि स्कीम को रिवैंप किया जाएगा, जिसमें बैंक लोन, यूपीआई लिंक्ड क्रेडिट कार्ड्स और कैपेसिटी बिल्डिंग सपोर्ट होगा। मैन्युफैक्चरिंग मिशन में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, फ्यूचर-रेडी वर्कफोर्स और क्लीन टेक पर फोकस रहेगा। टॉय सेक्टर में क्लस्टर्स डेवलपमेंट से हाई-क्वालिटी प्रोडक्ट्स बनेंगे, जो ‘मेड इन इंडिया’ ब्रांड को मजबूत करेंगे।
एजुकेशन सेक्टर में आईआईटी कैपेसिटी एक्सपैंशन और एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए 500 करोड़ रुपये का आउटलाय होगा। मेडिकल एजुकेशन में 10,000 अतिरिक्त सीट्स जोड़ी जाएंगी, जो अगले 5 वर्षों में 75,000 सीट्स तक पहुंचेंगी। ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी सभी सरकारी सेकेंडरी स्कूल्स और प्राइमरी हेल्थ सेंटर्स तक पहुंचेगी।
फाइनेंशियल इंडिकेटर्स में रेवेन्यू रिसीप्ट्स 27.3 लाख करोड़ से बढ़कर 30.9 लाख करोड़ रुपये हो सकते हैं। कैपिटल रिसीप्ट्स 0.8 लाख करोड़ रहेंगे। इफेक्टिव कैपिटल एक्सपेंडिचर 31.3 लाख करोड़ से 34.2 लाख करोड़ रुपये तक जाएगा। रेवेन्यू एक्सपेंडिचर 34.9 लाख करोड़ से 39.4 लाख करोड़ रुपये होगा।
| इंडिकेटर | 2023-24 (एक्टुअल्स) | 2024-25 (आरई) | 2025-26 (बीई) |
|---|---|---|---|
| फिस्कल डेफिसिट (% जीडीपी) | 5.8 | 4.4 | 4.3 |
| रेवेन्यू डेफिसिट (% जीडीपी) | 3.3 | 1.5 | 0.8 |
| प्राइमरी डेफिसिट (% जीडीपी) | 2.4 | 0.3 | 0.3 |
| टोटल ट्रांसफर्स टू स्टेट्स (लाख करोड़) | 17.06 | 20.65 | 25.60 |
| नेट सेंटर टैक्स रेवेन्यू (लाख करोड़) | 18.65 | 22.76 | 25.60 |
स्टेट्स की डिमांड्स में स्पेशल स्टेटस, पेंडिंग फंड्स और रेल लिंक्स शामिल हैं। ऑपोजिशन ने बजट को आईवॉश बताते हुए अनइक्वल ग्रोथ और अनएम्प्लॉयमेंट पर सवाल उठाए हैं। बजट में एआई रेगुलेशंस को क्लियर करने से टेक कंपनियां लाभान्वित होंगी।
फुटवियर और लेदर सेक्टर्स के लिए फोकस प्रोडक्ट स्कीम से 22 लाख रोजगार, 4 लाख करोड़ टर्नओवर और 1.1 लाख करोड़ एक्सपोर्ट्स का लक्ष्य है। कैंसर केयर के लिए सभी डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल्स में डे केयर सेंटर्स स्थापित होंगे। भारतीया भाषा पुस्तक स्कीम से डिजिटल इंडियन लैंग्वेज बुक्स उपलब्ध होंगी।
बजट में डेब्ट-टू-जीडीपी रेशियो को 2030-31 तक 50 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य रखा जाएगा। प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम का विस्तार एमएसएमई और एक्सपोर्टर्स को सपोर्ट करेगा। कस्टम्स ड्यूटी स्लैब्स को कम करके एक्सपोर्ट्स को पुश दिया जाएगा।
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